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Vadh 2 Movie Review: जेल की सलाखों के पीछे पनपी रूहानी मोहब्बत, अंत में रौंगटे खड़े कर देगा खतरनाक इंतकाम

By Bollywood halchal | Feb 06, 2026

अक्सर कहा जाता है कि सिनेमा केवल मनोरंजन के लिए होता है, लेकिन 'वध 2' (Vadh 2) जैसी फिल्में साबित करती हैं कि सिनेमा आपको गहराई से सोचने पर मजबूर भी कर सकता है। जसपाल सिंह संधू के निर्देशन में बनी यह फिल्म 'स्लो-बर्न' थ्रिलर का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो परिपक्व प्रेम और 'कर्मों के फल' की एक बेहद गहरी कहानी बुनती है। सच्चा प्यार शारीरिक आकर्षण का मोहताज नहीं होता, वह रूहानी और गहरा हो सकता है। जसपाल सिंह संधू के निर्देशन में बनी फिल्म 'वध 2' (Vadh 2) इसी विचार को एक खौफनाक थ्रिलर के साथ पिरोकर पेश करती है। यह फिल्म न केवल आपका मनोरंजन करती है, बल्कि आपको यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि इंसान जो बोता है, उसे इसी जन्म में काटना पड़ता है।

कहानी: प्यार और नैतिकता का जटिल जाल

'वध 2' की कहानी पिछले भाग से बिल्कुल अलग और ताज़ा है। फिल्म एक जेल गार्ड शंभूनाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी आर्थिक तंगहाली से जूझ रहा है। बेटे की विदेश में पढ़ाई के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने के चक्कर में वह जेल से सब्जियां तक चुराने पर मजबूर है।

इसी जेल में वह मंजू (नीना गुप्ता) के संपर्क में आता है, जो पिछले 28 सालों से एक ऐसे अपराध की सजा काट रही है जो उसने किया ही नहीं। इन दोनों के बीच एक ऐसा 'प्लैटोनिक' (इंद्रिय-अतीत) प्रेम पनपता है जो बिना मिले, बिना छुए भी बेहद गहरा और इंटेंस है। कहानी में मोड़ तब आता है जब जेल अधीक्षक प्रकाश सिंह (कुमुद मिश्रा) की एंट्री होती है, जो अपनी ईमानदारी के लिए जाना जाता है। इसके बाद जेल के भीतर जो खेल शुरू होता है, वह फिल्म को एक लेयर्ड थ्रिलर बना देता है।

अभिनय: जब मंझे हुए कलाकार कमान संभालें

जब पर्दे पर संजय मिश्रा, नीना गुप्ता और कुमुद मिश्रा जैसे दिग्गज हों, तो आप एक अलग स्तर के अभिनय की उम्मीद कर सकते हैं।

संजय मिश्रा: उन्होंने एक मजबूर पिता और एक प्रेमी के रूप में अपनी साधारणता (ordinariness) से दिल जीत लिया है। उनकी धीमी तीव्रता (Slow Intensity) ही फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण है।

नीना गुप्ता: मंजू के किरदार में नीना गुप्ता ने अपनी आँखों और खामोशी से वो सब कह दिया है जो शब्द नहीं कह सकते। उनका अभिनय फिल्म को एक भावनात्मक गहराई देता है।

कुमुद मिश्रा और अन्य: कुमुद मिश्रा ने एक ईमानदार अधिकारी के रूप में शानदार काम किया है। वहीं शिल्पा शुक्ला, अमित के. सिंह, अक्षय डोगरा और योगिता बिहानी जैसे कलाकारों ने भी अपने छोटे लेकिन महत्वपूर्ण किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है।

निर्देशन और लेखन: 'Spectacle' नहीं, कहानी है असली हीरो

निर्देशक जसपाल सिंह संधू ने साबित कर दिया है कि एक अच्छी फिल्म के लिए आपको सिक्स-पैक एब्स वाले सितारों या भारी-भरकम वीएफएक्स की जरूरत नहीं है। 'वध 2' का स्क्रीनप्ले कहीं भी ढीला नहीं पड़ता। यह फिल्म 'एक्शन' के बजाय 'इमोशनल कनफ्लिक्ट' (भावनात्मक संघर्ष) पर ध्यान केंद्रित करती है। फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका यह संदेश है- "जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।" यह थ्रिलर और प्रेम कहानी का एक ऐसा मेल है जो आपको अंत तक अपनी सीट से बांधे रखता है।

फिल्म के मजबूत पक्ष 

परिपक्व प्रेम कहानी: प्यार की कोई उम्र नहीं होती और यह फिल्म इसे बहुत ही गरिमा के साथ दिखाती है।

थ्रिलर एलिमेंट: फिल्म एक जटिल नैतिक भूलभुलैया (Moral Maze) की तरह है, जहाँ सही और गलत के बीच की रेखा बहुत धुंधली है।

साधारणता की खूबसूरती: पात्रों का एक आम इंसान की तरह दिखना और व्यवहार करना दर्शकों को उनसे जोड़ता है।

निष्कर्ष 

'वध 2' केवल एक एंटरटेनमेंट फिल्म नहीं है, बल्कि यह एक 'थॉट-प्रोवोकिंग' (सोचने पर मजबूर करने वाला) अनुभव है। लव रंजन और अंकुर गर्ग के निर्माण में बनी यह फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म और सिनेमाघर दोनों के लिए बेहतरीन कंटेंट है। अगर आप अच्छी कहानियों और शानदार अभिनय के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए 'मस्ट-वॉच' है।

कलाकार: संजय मिश्रा, नीना गुप्ता, कुमुद मिश्रा, शिल्पा शुक्ला, योगिता बिहानी 

निर्देशक: जसपाल सिंह संधू 

निर्माता: लव रंजन और अंकुर गर्ग (लव फिल्म्स) 

रिलीज डेट: 6 फरवरी, 2026 (सिनेमाघरों में)

रेटिंग: 4.5/5
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